कविता मेरे लिए, मेरे आत्म का, शेष जीवन जगत के स‌ाथ चलनेवाला रचनात्मक स‌ंवाद है। कविता भले शब्दों में बनती हो लेकिन वह स‌ंवाद अंतत: अनुभूति के धरातल पर करती है। इसलिए प्रभाव के स्तर पर कविता चमत्कार की तरह लगती है। इसलिए वह जादू भी है। स‌ौंदर्यपरक, मानवीय, हृदयवान, विवेकशील अनुभूति का अपनत्व भरा जादू। कविता का स‌म्बन्ध मूल रूप स‌े हृदय स‌े जोड़ा जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं स‌मझना चाहिए कि उसका बुद्धि स‌े कोई विरोध होता है। बल्कि वहाँ तो बुद्धि और हृदय का स‌ंतुलित स‌मायोजन रहता है; और उस स‌मायोजन स‌े उत्पन्न विवेकवान मानवीय उर्जा के कलात्मक श्रम और श्रृजन की प्रक्रिया में जो फूल खिलते हैं, वह है कविता ... !

गुरुवार, 23 सितंबर 2010

मतलब, तुमसे नहीं मिल स‌कता









तुम्हारी याद लिए
अचानक खुलती हैं आंखें                                                                                      

खीझ स‌नी सुबह को
चाय के सा‌थ जल्दी-जल्दी सु‌ड़कता
सो‌चता हूँ तुम्हारे सा‌थ हुई कल की बातें ...
दिन काफी चढ़ आया है !

रात भर दु:स्वप्न में उलझी
अपनी अस्त-व्यस्त आँखों में
मुश्किल से ढूढ़ पाता हूँ
तुम्हारा हँसता चेहरा ...
नल में आज भी पानी नहीं है !

छत की मुंडेर पर
लगा है कौओं का जमघट
कांव-काँव ... काँव-कांव ... काँ.....व..
ढीठ-ढीठ
हिलती है काली पीठ
खुलती है काली चोंच
बोलती है जाली सोच
आज हड़ताल है !
मतलब, तुमसे नहीं मिल स‌कता

टूथ-ब्रश बुरी तरह खिया गया है
बचा-खुचा टूथ-पेस्ट खुरचता सोचता हूँ
तुम्हें कल ' कुछ अच्छा सा ' भेंट करुँगा
या कि एक कविता ही लिखूँगा
तुम्हारे लिए ...

नाश्ता कर लो !
पुकारती है माँ

एकाएक मुस्कुरा पड़ता हूँ
देखता हूँ लाल-लाल फूलों से लद गया है गुलमोहर
कल तुमसे जब मिलूँगा
ढेर सारी बाते करूँगा तुम्हें खूब प्यार करूँगा ...
क्या सोच रहे हो ?
पूछते हैं पिताजी

इम्तिहान सिर पर है
कमरे में बिखरी हैं किताबें
साहित्य...विज्ञान... राजनीति...
जिंदगी की तरह कुछ भी अपनी जगह नहीं है
इधर की उधर
उधर की इधर !
वहीं बीच में
तुम्हारा दिया स्वर्ण-चम्पा का एक ताजा फूल भी है
प्रेम..स्पर्श..सुगंध..सपने..नौकरी..
संघर्ष..बेकारी...मौत !
स‌बकुछ कितना अजीब है !!

नहाते क्यों नहीं ?
पूछते हैं पिताजी

खाते क्यों नहीं ?
पूछते हैं पिताजी

पढ़ते क्यों नहीं ?
पूछते हैं पिताजी
उन्हें क्या मालूम कि आज हड़ताल है
        मतलब, तुमसे नहीं मिल स‌कता


4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति| धन्यवाद|

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  2. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
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  3. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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